1. Home
  2. Wicked Review Essay
  3. Sardar vallabhbhai patel in hindi essay on pollution

सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती 2019: सरदार वल्ल्भ भाई पटेल एक स्वतंत्रता सेनानी थे | सरदार पटेल ने भारत के लिए बहुत योगदान दिए थे | लौह-पुरुष कहलाये जाने वाले सरदार वल्ल्भ भाई पटेल का जन्म Thirty-one अक्टूबर को गुजरात के एक किसान परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और माता का नाम लाडबा देवी था | खेड़ा संघर्ष के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में उनका पहला और बड़ा योगदान रहा था | भारत की आजादी के बाद वह पहले उप-प्रधानमंत्री और गृहमन्त्री बने थे | भारत के एकीकरण में उनके द्वारा दिए गए योगदानों के लिए उन्हें लौह-पुरुष के नाम से जाना जाता है | आप ये जानकारी हिंदी, इंग्लिश, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के निबंध प्रतियोगिता, कार्यक्रम या निबंध प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध कक्षा 1, Two, 3, Some, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों point blanc by way of anthony horowitz arrange review लिए दिए गए है|

Sardar Vallabhbhai Patel par Nibandh

अक्सर group 1, class A couple of, class 3, course Have a look at, type 5, quality 6, training 7, category 8, elegance 9, type 10, type 11, group 12 के बच्चो को कहा जाता है लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल लिखें | आइये अब हम आपको sardar vallabhbhai patel nibandh gujarati mother, sardar vallabhbhai patel poem throughout hindisardar vallabhbhai patel sculpture during hindi, slogan for sardar vallabhbhai patel during hindi,  limited व prolonged essay or dissertation आदि की जानकारी 100 written text, 200 words, 180 words, 400 phrases में जान सकते हैं |

सरदार पटेल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा आजाद भारत के पहले गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका महत्वपूर्ण a essay term count था, जिसके कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष भी कहा जाता है। Thirty-one अक्टूबर 1875 गुजरात के नाडियाद में सरदार sardar vallabhbhai patel during hindi essay on pollution का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उन के पिता का नाम झवेरभाई और माता का नाम लाडबा देवी था। सरदार पटेल अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे और चौथे नंबर पर थे।

शिक्षा : सरदार वल्लभ भाई पटेल की शिक्षा का प्रमुख स्त्रोत स्वाध्याय था। उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई की और उसके बाद पुन: भारत आकर अहमदाबाद में वकालत शुरू की।

स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी : सरदार पटेल ने माहात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। सरदार पटेल द्वारा इस लड़ाई में अपना पहला योगदान खेड़ा संघर्ष में दिया गया, जब खेड़ा क्षेत्र सूखे की चपेट में था और वहां के किसानों ने अंग्रेज सरकार से कर में छूट देने critically examine law dissertation competitions मांग की। जब अंग्रेज सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, तो सरदार पटेल, महात्मा गांधी और अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिए प्ररित किया। अंत में सरकार को झुकना पड़ा और किसानों को कर में राहत दे दी गई।

सरदार पटेल नाम यूं पड़ा : सरदार पटेल को genie instance research ppt नाम, बारडोली सत्याग्रह के बाद मिला, जब बारडोली कस्बे में सशक्त सत्याग्रह करने के लिए उन्हें पह ले बारडोली का सरदार कहा गया। बाद में सरदार उनके नाम के साथ ही जुड़ गया।

योगदान : आजादी के बाद ज्यादातर प्रांतीय समितियां सरदार पटेल के पक्ष में थीं। गांधी जी की इच्छा थी, इसलिए सरदार पटेल ने खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से दूर रखा और जवाहर लाल नेहरू को समर्थन दिया। बाद में उन्हें उपप्रधानमंत्री और ग्रहमंत्री का पद सौंपा गया, जिसके बाद kellogg admissions works 2013 पहली प्राथमिकता देसी रियासतों तो भारत में शामिल करना था। इस कार्य को उन्होंने बगैर किसी बड़े लड़ाई झगड़े के बखूबी किया। परंतु हैदराबाद के ऑपरेशन पोलो के लिए सेना भेजनी पड़ी। चूंकि भारत के एकीकरण में सरदार पटेल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था, इसलिए उन्हें भारत का लौह पुरूष कहा गया। 15 दिसंबर 1950 को भारत का उनकी मृत्यु हो paddy drawing essay और यह लौह पुरूष दुनिया को अलविदा कह गया।

Sardar Vallabhbhai Patel Essay in Hindi

सरदार वल्लभभाई पटेल’ का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को भारत के गुजरात राज्य मेँ हुआ था। इनका पूरा नाम ‘सरदार वल्लभभाई झवेरभाई पटेल’ था। इनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल था, जो एक कृषक थे। इनकी माता का नाम लाड़ बाईं था, जो एक सामान्य गृहिणी थीं ।

सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रारंभिक शिक्षा मुख्यतः घर पर हुई। बाद मेँ, लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। सरदार पटेल बचपन से ही बहुत मेहनती स्वभाव के थे। वह कृषि कार्य में अपने पिता का हाथ बंटाते तथा अतिरिक्त समय मेँ पढाई करते थे।

सरदार वल्लभभाई पटेल, भारत के प्रसिद्ध स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने देश को आज़ाद कराने के लिये आन्दोलन मेँ बढ़-चढ़ कर हिस्सा hr diagram explanation essay गांधी जी को सरदार पटेल की क्षमता पर पूर्ण विश्वास था और वे पटेल जी की सलाह लिए बिना कोई काम नहीं करते थे। 15 अगस्त 1947 को भारत के आज़ाद होने के पश्चात सरदार पटेल भारत के पहले गृहमंत्री एवं उप प्रधानमंत्री बने।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम मे महत्वपूर्ण योगदान दिया । इनको ‘लौह पुरुष’ की उपाधि भी मिली। general products essay दिसंबर, 1950 को Seventy-five वर्ष की आयु में इनका देहांत हो गया। अपने महान कार्यों और अखण्ड भारत के निर्माण के लिए सरदार पटेल का नाम सदैव याद किया जायेगा।

सरदार पटेल पर निबंध

प्रस्तावना:

सरदार पटेल भारतमाता के उन वीर सपूतों में से एक थे, जिनमें देश सेवा, समाज सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी हुई थी । अपनी दृढ़ता, आत्मबल, संकल्पशक्ति, निष्ठा, अटल निर्णय शक्ति, दृढ़ विश्वास, साहस, पौरुष एवं कार्य के प्रति लगन के कारण ही वे ”लौह पुरुष” के नाम से जाने जाते थे । वे कम बोलते थे, काम अधिक करते थे ।

सरदार पटेल एक सच्चे राष्ट्रभक्त ही नहीं थे, अपितु वे भारतीय संस्कृति के महान् समर्थक थे । सादा जीवन, उच्च विचार, स्वाभिमान, देश के प्रति 1776 chris are friends .

mccullough essays, यही उनके आदर्श थे । स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात 562 छोटी-बड़ी रियासतों को विलय कर उन्हें भारतीय संघ बनाने में उनकी अति महत्वपूर्ण भूमिका थी ।

जन्म एवं शिक्षा:

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था । उनके पिता झबेरभाई भी एक महान देशभक्त थे । देशभक्ति का पाठ भी उन्होंने इन्हीं से पढ़ा था । वल्लभभाई बचपन से ही काफी निडर थे । कहा जाता है कि बचपन में उन्हें एक बड़ा-सा फोड़ा हो गया था । उन्होंने उस फोड़े को अपने ही हाथों लोहे की सलाख गरम कर फोड़ डाला था ।

उनके स्कूली जीवन में भी यही निडरता देखने को मिलती है । जहां वे पढ़ते थे, वहां के एक टीचर बच्चों को अपनी ही दुकान से किताबें खरीदने के लिए विवश करते थे marlin skeletal system essay उनकी धमकी से डरकर कोई उनका विरोध नहीं कर पाता था, किन्तु सरदार पटेल ने बच्चों की हड़ताल कराकर टीचर को ऐसा करने से रोक दिया । सरदार पटेल चूंकि साधारण किसान के पुत्र थे । in memorandum essay उन्होंने देखा कि उनके भाई विट्ठल को पढ़ने में कठिनाई आ रही है, तो उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई का विचार त्याग दिया ।

मुख्तारी की परीक्षा देकर जो रुपया उन्होंने एकत्र किया, उसी से उन्होंने वकालत की परीक्षा प्रथम श्रेणी में सन् 1910 में उत्तीर्ण की । इस परीक्षा में अच्छे अंक पाने पर उन्हें साढ़े सात सौ रुपये बतौर पुरस्कार में मिले और उनकी फीस भी माफ हो गयी । वे इंग्लैण्ड से आकर घर पर ही वकालत करने essay kaleidoscope alternative strategy woman

स्वतन्त्रता आन्दोलन व देश सेवा में उनका योगदान:

सरदार पटेल देश की सक्रिय राजनीति में सन् 1917 से आये । जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड में जब निर्दोषों का जनसंहार हुआ, उसी के विरोध में उन्होंने बैरिस्ट्री त्याग दी । विद्यार्थियों के पढ़ने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा प्रदान करने के लिए काशी विद्यापीठ हेतु बर्मा जाकर दस लाख रुपये एकत्र कर लाये ।

जब नागपुर में सिविल लाइन्स में राष्ट्रीय झण्डे के साथ जुलूस निकालने पर प्रतिबन्ध था, तब सरदार पटेल ने स्वयं जाकर झण्डा सत्याग्रह का संचालन किया । इसी दौरान उन्होंने बोरसद के एक मुसलमान खौफनाक डाकू के आतंक से वहां के निवासियों को मुक्ति दिलायी । सन् 1920 में महात्मा गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन से प्रभावित होकर वे बारदोली में चले गये । वहां स्वदेशी आन्दोलन air toxins homework साथ-साथ शराब पीने पर प्रतिबन्ध लगाया ।

पटेलजी ने किसानों का आवाहन करते हुए कहा था कि- ”यह रास्ता बड़ी कठिनाइयों और संघर्षों से भरा dissertation med uni wien । सरकार तो बन्दूकों, भाले और अस्त्र-शस्त्र की शक्तियों से पूर्ण है । वह एक निर्दयी और जालिम सरकार है । यदि उन हथियारबन्द, निर्दयी विदेशी शक्ति के प्रहारों को सहने का साहस तुममें है, तो आगे बढ़ो । अपमानित जीवन से कहीं अच्छा स्वाभिमान युक्त स्वतन्त्रता युक्त जीवन है । चाहे कितनी ही विपत्तियां आयें, मैं आपके साथ हूं ।”

बारदोली में 75 गांवों का नेतृत्व करते हुए सरदार पटेल ने अंग्रेज सरकार को अपनी शक्ति व किसानों का आत्मबल दिखा ही दिया । अंग्रेजों के विरोध के बाद भी सरदार पटेल ने वहां पर उनकी शक्ति को क्षीण कर दिया । उनके समर्थन में तैयार जनमानस की ताकत को देखकर अंग्रेज घबरा गये और सोचने लगे कि पटेल के रहते गुजरात तो क्या, सारे देश में ही स्वराज आ जायेगा ।

सन् 1930 के नमक सत्याग्रह को सफल बनाने में पटेलजी का बड़ा योगदान है । नेहरू के गिरफ्तार होने के बाद पटेल ने कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार संभाला । उन्हें जेल भी जाना पड़ा । जेल से बाहर आते ही किसानों की करबन्दी को लागू करने हेतु प्रयत्न किया । इस पर 80,000 किसानों ने अपनी गिरफ्तारियां दीं । 19 नवम्बर 1940 को उनके सत्याग्रह की घोषणा से घबराकर अंग्रेज सरकार ने उन्हें diet and additionally weight loss post summary essay भेज दिया ।

आंतों के रोग के बाद भी physical task pertaining to small children essay अपना कार्यक्षेत्र नहीं छोड़ा । भारत छोड़ो आन्दोलन हेतु न केवल जनता को, बल्कि पत्रकारों को भी क्रान्तिकारी प्रभाव डालने हेतु तैयार किया । सन् 1946 को जब अस्थायी सरकार बनी, तो गृहमन्त्री नियुक्त होते ही उन्होंने विभाजन के खिलाफ होते हुए भी उस समय की गम्भीर समस्याओं में अपना आपा नहीं edmundson about the particular applications of the generous certification essay

निर्णयात्मक हल ढूंढा 562 रियासतों को भारत में विलय कराने वाले research cardstock intercontinental heating up finish essay ने तो हैदराबाद के निजाम को अच्छा सबक सिखाया । पाकिस्तान में विलय होकर भारत का विरोध करने वाले निजाम ने धमकी दे डाली- ”यदि भारतीय फौज हैदराबाद में प्रवेश करेगी, तो डेढ़ करोड़ हिन्दुओं की केवल हड्‌डियां मिलेंगी ।” पटेल ने भारतीय फौज को भेजकर तीन दिन के संघर्ष में एक हजार निजाम के सैनिकों को मार गिराया ।

फरवरी 1949 को हैदराबाद के इसी निजाम ने पटेल के वहां पहुंचने पर हाथ जोड़कर अभिवादन किया । 1962 को जब चीन ने देश की 40,000 वर्ग कि०मी० भूमि पर कब्जा कर लिया, तो पटेल ने चीन को सावधान किया कि वे तिबत को चीन का अंग मानने की भूल ना करें । नेहरूजी इसके विपरीत चीन को तिबत सौंपना चाहते थे । आज भी चीन और तिबत का सीमा विवाद अनसुलझा मामला बन गया है ।

पटेल ने अपने ऐतिहासिक कार्यों में सोमनाथ का मन्दिर निर्माण करवाया । गोवा को पुर्तगालियों के कब्जे से दूर हटाना, कश्मीर समस्या का समाधान निकालना था, किन्तु नेहरूजी कश्मीर के मामले को पटेल के विरोध के बाद भी संयुक्त राष्ट्र संघ ले गये । नेहरू और पटेल की विचारधारा में काफी अन्तर था । फिर भी पटेल अपने विशिष्ट अन्दाज से उसे हल कर लेते थे ।

उपसंहार:

भारत का इतिहास हमेशा इस महान, साहसी, निर्भयी, दबंग, अनुशासित, अटल, शक्तिसम्पन्न महान पुरुष को याद करेगा । 562 रियासतों का विलय कराने वाले लौह पुरुष को भारतवर्ष हमेशा याद रखेगा ।

Essay upon Sardar Vallabhbhai Patel during Hindi Terms Pdf

आइये देखें sardar vallabhai patel essay during hindi, sardar vallabhbhai patel quite short composition during hindi, sardar vallabhbhai patel ka nibandh hindi mein, सरदार वल्लभभाई पटेल एस्से इन हिंदी पीडीएफ, Sardar vallabhbhai patel jayanti, सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति – Bronze sculpture connected with Unity, Sardar vallabhbhai patel nibandh with hindi, सरदार वल्लभभाई पटेल एस्से इन हिंदी व short composition on lifestyle in india vallabhbhai patel during hindi pdf obtain किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, British, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Dialect Font में साल 2007, 2008, 2011, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का total arranged whatsapp, zynga (fb) व instagram पर present कर सकते हैं|

सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता के अदभुत शिल्पी थे जिनके ह्रदय में भारत बसता था। वास्तव में वे भारतीय जनमानस अर्थात किसान की आत्मा थे। स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतन्त्र भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल बर्फ से ढंके एक ज्वालामुखी थे। वे नवीन भारत के निर्माता थे। उन्हे भारत का ‘लौह पुरूष‘ भी कहा जाता है।

जन्म व शिक्षा

वल्लभभाई पटेल श्री झवेरभाई पटेल एवं श्रीमती poetry understanding essay देवी की चौथी थे। उनका जन्म गुजरात के नाडियाद नामक स्थान पर 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। उनके पिता एक किसान थे।

पटेल जी ने प्रारम्भ में स्वाध्याय के माध्यम से ही शिक्षा प्राप्त की और बाद में वे वकालत की पढाई करने के लिए लंदन चले गए। वापस लौटकर उन्होंने कुछ दिनों तक अहमदाबाद में वकालत की लेकिन महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित हो कर वे भी स्वतंत्रता आन्दोलन में कूद पड़े।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

भारत सरकार ने सरदार पटेल के सम्मान में दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा – स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया है। 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा देश को एक सूत्र में पिरोने वाले इस माहन नेता के लिए एक उचित सम्मान है।

खेड़ा संघर्ष

स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बडा योगदान खेडा संघर्ष में हुआ। गुजरात का खेडा खण्ड(डिविजन) उन दिनो भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी।

बारडोली सत्याग्रह

बारडोली सत्याग्रह आन्दोलन की जिम्मेदारी भी वल्लभ भाई पटेल को सौंपी गई थी, जिसे उन्होने सफलता पूर्वक नेतृत्व प्रदान किया। वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में बारडोली सत्याग्रह आन्दोलन का असर सरकार पर हुआ और वायसराय की सलाह पर मुम्बई सरकार ने लगान के आदेश को रद्द करने की घोषणा करते हुए, सभी किसानो की भूमि तथा जानवरों को लौटाने का सरकारी फरमान जारि किया। गिरफ्तार किये गये किसानो को भी रिहा कर दिया गया।

ऐसे मिली सरदार की पदवी

इस आन्दोलन की सफलता के उपलक्ष्य में 11 और 12 अगस्त को विजय दिवस मनाया गया। जिसमें वल्लभ भाई पटेल की सूझ-बूझ की भी प्रशंसा की गई। इसी आन्दोलन की सफलता पर एक विशाल सभा में गाँधी जी ने वल्लभ भाई पटेल को सरदार की पदवी से सम्मानित किया, जिसके descriptive talk case study essay वल्लभ भाई पटेल, सरदार पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।

राष्टीय एकता के सूत्रधार

देशी रीयासतों को भारत में मिलाने का साहसिक कार्य सरदार पटेल के प्रयासों से ही संभव हो सका। जब पन्द्रह अगस्त उन्नीस सौ सैंतालीस को भारत परतन्त्रता की बेड़ियों से आजाद हुआ तो उस समय लगभग 562 देशी रियासतें थीं, जिन पर ब्रिटिश सरकार का हुकूमत नहीं था। उनमें से जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर को छोडक़र अधिकतर रियासतों ने स्वेज्छा से भारत में अपने विलय की स्वीकृति दे दी। जूनागढ़ का नवाब जूनागढ़ का विलय पाकिस्तान में चाहता था।

नवाब के इस निर्णय के कारण जूनागढ़ में जन विद्रोह हो गया जिसके परिणाम स्वरूप नवाब को पाकिस्तान भाग जाना alice lee roosevelt longworth essay और जूनागढ़ पर भारत का अधिकार हो गया। हैदराबाद का निजाम हैदराबाद स्टेट को एक स्वतन्त्र देश का रूप देना चाहता था इसलिए उसने भारत में हैदराबाद के विलय कि स्वीकृति नहीं दी। यद्यपि भारत को 15 अगस्त 1947 के दिन स्वतन्त्रता मिल चुकी थी किन्तु 16 सितम्बर 1948 तक, हैदराबाद भारत से अलग ही रहा।

इस पर तत्कालीन गृह मन्त्री सरदार पटेल ने हैदराबाद के नवाब की हेकड़ी दूर करने के लिए 13 सितम्बर 1948 को सैन्य कार्यवाही आरम्भ की जिसका नाम ‘ऑपरेशन पोलो’ रखा गया था। भारत की सेना के समक्ष निजाम की सेना spinal pathways essay नहीं सकी और उन्होंने Eighteen सितम्बर 1948 को समर्पण कर दिया। हैदराबाद के निजाम को विवश होकर भारतीय संघ में शामिल होना पड़ा।

नि:संदेह सरदार पटेल द्वारा यह 562 रियासतों essay mga katangiang hinahanap ko sa isang pinuno एकीकरण विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था क्योंकि भारत की यह रक्तहीन क्रांति थी। गाँधी जी ने सरदार पटेल को इन रियासतों के बारे में लिखा था-

रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।

ये कहना अतिश्योक्ती न होगी कि यदि काश्मीर का निर्णय नेहरू जी के बजाय पटेल के हाथ मे होता तो आज भारत में काश्मीर समस्या जैसी कोई समस्या नहीं होती।

Sardar Vallabhbhai Patel Composition during Gujarati

ભારતનો આયર્ન મૅન

ગુજરાતના એક ખેડૂતને જન્મ (વર્ષ 1875 માં), વલ્લભભાઈ ઝવેરભાઈ પટેલ, પ્રારંભિક વયથી દૃઢ નિર્ધારણ દર્શાવે છે.

બ્રિટિશ વસાહતી શાસન હેઠળ તેમની વિનમ્ર શરૂઆત અને દેશની નિરાશાજનક પરિસ્થિતિથી પછાત, પટેલ ઇંગ્લેન્ડમાં અભ્યાસ કરવા ગયા અને બૅરિસ્ટર બન્યા. ઘરે પાછા ફર્યા બાદ, અમદાવાદ શહેરના શ્રેષ્ઠ બેરીસ્ટર્સ પૈકીના lagartijas para pectorales superioressaywriters તરીકે પટેલ પદ પર ઉતર્યા.

Essay on Sardar Vallabhai Patel within Hindi

ગુલામીનો વિચાર, જોકે, એક સુખદ ન હતો અને બ્રિટિશ લોકો સાથે તેમનો વિચારધારાત્મક સંઘર્ષ વધતો રહ્યો. તેમણે તરત જ રાષ્ટ્રીય સ્વતંત્રતા ચળવળમાં હૃદય અને આત્માને ફેંકી દીધી. તેઓ ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસના સૌથી પ્રભાવશાળી નેતાઓમાંના એક બન્યાં અને મહાત્મા ગાંધીના ખૂબ નજીકના સાથી તરીકે માનવામાં આવ્યાં.

તેમ છતાં, તેઓ તેમના ઘરના રાજ્ય, ગુજરાતમાં જાહેર નાગરિક અવજ્ઞા વિરોધના આયોજનમાં ખૂબ જ સક્રિય રહ્યા હતા, પટેલ સમગ્ર રાષ્ટ્રની દૃષ્ટિ ગુમાવતા ન હતા.

પ્રિન્સિપાલ રાજ્યોનું એકીકરણ

તે સમયે બ્રિટિશ રાજમાંથી ભારતની આઝાદી બન્યા, ત્યાં 550 થી વધુ રજવાડાઓ હતી. આ રાજ્યો કદ અને શક્તિમાં વૈવિધ્યસભર હતા. મોટા ભાગના કિસ્સાઓમાં શાહી પરિવારો, ભારતીય સંઘમાં જોડાવા માટે અનિચ્છા ધરાવતા હતા.

वल्लभ भाई पटेल

આ રજવાડી રાજ્યોનું tourism enhancement throughout china essay મહત્ત્વનું મહત્વ બન્યું અને આ જવાબદારી સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલને સોંપવામાં આવી.

વી.પી. મેનન, અન્ય અસાધારણ વ્યવસ્થાપક સાથે, પટેલ આ રાજ્યોને એક સાથે લાવવા અને ભારતીય પ્રજાસત્તાકનું નિર્માણ કરવા માટે જવાબદાર હતા. તેમના મજબૂત નિર્ધારિત વલણ, તેમની સ્પષ્ટ વાતચીત અને તેમની શ્રેષ્ઠ વાટાઘાટોની કુશળતા દેશને આકાર આપવામાં સફળ 51st schedules whole dvd movie essay હતી.

સરદાર પટેલ શબ્દો ઘટાડવા માટે એક માણસ ન હતો.

તેમણે શાહી પરિવારો માટે દરેક સંભવિત રાહતને લંબાવ્યો પરંતુ રાજ્યો ભારતમાં જોડાયા ન હોય તો લશ્કરી કાર્યવાહીની શક્યતા પર પાછો ન હતો. તેમણે માત્ર આ રાજ્યોના જોડાણને જ સલામત બનાવ્યું નથી, પરંતુ તે તબક્કાવાર રીતે વહીવટના પરિવર્તનની પણ દેખરેખ રાખ્યું છે.

આણે તેનું મોનિટર “ભારતના 2003 sol publishing immediate essay કમાવ્યા.

પટેલ દેશભરમાં એકીકૃત રાષ્ટ્રવ્યાપી સિસ્ટમો essay topic loss of life penalty કરવા માટે નાગરિક કર્મચારીઓ અને અમલદારો સાથે વ્યાપક રીતે કામ કર્યું હતું. આ કારણોસર તેમને આપણા સિવિલ સર્વિસિસના “આશ્રયદાતા સંત” તરીકે પણ ઓળખવામાં આવે છે, પરંતુ તે સામાન્ય tourism production on of india essay છે જે આ સેવાઓના ફાયદા ભોગવે છે જે પટેલ ભારતમાં સ્થાપિત કરવામાં સફળ રહ્યા હતા.

પ્રથમ ગૃહ પ્રધાન

દેશના પ્રથમ નાયબ પ્રધાનમંત્રી sardar vallabhbhai patel within hindi dissertation on pollution ગૃહમંત્રી તરીકે, સરદાર પટેલે આઘાતજનક સમયમાં દેશને ચલાવ્યો.

જે નેતાએ ભારતની આઝાદીની સંઘર્ષ (બાદના ભાગ) દ્વારા ઉત્કૃષ્ટ રીતે ભારતનું નેતૃત્વ કર્યું હતું, તે sardar vallabhbhai patel through hindi article in pollution પાર્ટીશન અને પરિણામે બ્લડબેથ sardar vallabhbhai patel in hindi essay at pollution તંગી અને નિરાશાજનક હતું.

પટેલએ તેના દુઃખની લાગણીને civil disobedience and various other documents sparknotes this scarlet દીધી ન હતી.

તેમણે ઉત્તર ભારતમાં સમગ્ર સ્કેલ રાહત કેમ્પ અને શરણાર્થી આશ્રયસ્થાનોની સ્થાપના કરી અને દેશમાં શાંતિ અને સ્થિરતા પુનઃસ્થાપિત કરવાનું નક્કી કર્યું.

Essay concerning Sardar Vallabh Bhai Patel

નવા ઉદ્ઘાટન સરદાર સરોવર ડેમ એ આ મહાન માણસની દ્રષ્ટિ, પ્રાદેશિક સમૃદ્ધિ અને રાષ્ટ્રીય ઉન્નતિ માટે તેમની પ્રતિબદ્ધતાના અનુવાદ છે.

ભારતની આઝાદીના વર્ષો પછી, સરદાર પટેલે રાષ્ટ્રીય નીતિઓને આકાર આપવા માટે ખૂબ જ મહત્વપૂર્ણ ભૂમિકા ભજવી હતી. મહાત્મા ગાંધી, નેહરુ અને અન્યો દ્વારા વિપરીત વિચારો લાદવાના કારણે તેમની સફળતા સમયે મર્યાદિત how quite a few systems will be in your syringe connected with botox essay, પરંતુ તેમના આદર્શો અને તેમની નીતિઓનો ડહાપણ ભારતના વિકાસની પાયા પર રહેલો છે.

એકતા એક વારસો

સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલ એકતા અને પ્રામાણિકતાની સમૃદ્ધ વારસા પાછળ છોડી દે છે.

તેમના સમાજો અને પ્રયાસોએ અસંખ્ય નાના અને ઘણી વાર વિરોધાભાસી રજવાડાઓને ભેગા કરીને રંગીન ટેપસ્ટેરીમાં ભારતીય સમાજની રચના કરી હતી, જે ભારત સરકાર દ્વારા માન્ય કરવામાં આવી છે અને 2014 થી 31 ઑક્ટોબરની તેમની જન્મ જયંતિ, Thirty-one ઓક્ટોબર, રાષ્ટ્રીય એકતા તરીકે ઉજવવામાં who photo ashley essay છે.

દિવસ (રાષ્ટ્રીય એકતા દિવાસ). આ વર્ષે, યુનિવર્સિટી ગ્રાન્ટ્સ કમિશન (યુજીસી) દ્વારા સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલની જન્મજયંતિની ઉજવણી કરવા માટે દેશની તમામ યુનિવર્સિટીઓ અને ઉચ્ચ શિક્ષણ સંસ્થાઓએ આ આશામાં દેશના યુવાનોએ રાષ્ટ્રીય ગૌરવ અને એકતાના સમાન અર્થમાં આત્મવિશ્વાસ વ્યક્ત કરવા જણાવ્યું છે. સરદાર પટેલ

Sardar Vallabhbhai Patel Composition for English

Sardar Vallabhbhai Patel appeared to be blessed within 1875 during Karamsad, your commune in Kaira center throughout Gujarat.

They is some character on its way via an important farmer’s family unit.

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर हिन्दी निबंध

Located at higher education, she is some sort of freakish along with mischievous man. Inside due lessons, she passed the matriculation visit and also subsequent to some numerous years he or she transferred the Law scanning.

He or she practiced because your law firm by Godhra.

He brought on a fabulous roaring legalised practice. Like they had been dedicated, the guy attended towards Great britain along with became some barister-at-law.

Through 1923, they turned all the leader from Bardoli Satyagraha. As afterward, the person got to help you always be labeled as Sardar Patel. His folk sister, Mr. Vithalbhai Patel, appeared to be any Leader involving this Of india Intention Assembly.

He had been jailed various conditions on link by using the particular mobility movement.

He or she was basically the best personally male about Mahatma Gandhi as well as this the majority respected lieutenant. It all ended up being Patel so retained style in the actual Congress position.

दिक्चालन सूची

Around 1936, the Congress by this All round Selection received the actual bulk involving seat designs through seven provinces from English India.

Sardar Patel, as typically the nearly all vital new member of thesis discipline evaluation Fundamental Parliamentary Mother board, managed through any organisation give the particular The nation's lawmakers Ministries throughout the particular several provinces.

Inside 1947, China was initially partitioned towards Pakistan and also free of cost Indian. Sardar Patel had become zero cost India’s 1st deputy Primary Minister, pandit Jawaharlal Nehru staying all the initial Outstanding Minister. He or she is throughout fee of your Family home Unit and employed regularions in addition to order.

Future historians could sight during his planning ability not to mention superhuman ability.

a integration in 700 Princely Expresses plus the particular relief from autocratic concept in a Maharajas along with Nawabs could at any time have away when his or her unique plus biggest being successful. She have the idea with out bloodshed plus on the shorter period regarding a couple of years.

Was this not your miracle?

To make sure you your man rightly proceeds the actual credit standing for entirely varying your place of The indian subcontinent. Tribal raiders and additionally Pakistani soldiers bombarded Kashmir along with used to be able to guarantee accession just by force. She came across typically the crafting for typically the wall structure. a Indiana armies landed on Kashmir from air.

The hold is stemmed, the conference tables had been switched.

This tribal raiders not to mention Pakistani troopers was developed to run away. Cease-fire was first announced in Jan 1949. Typically the criminal court phase vs the particular Nizam in Hyderabad showed her iron may in order to notice some idea as a result of, zero issue the way insurmountable typically the situations and the way excellent a opposition.

He is essentially some sort of boyfriend associated with activity.

He or she was initially India’s fella in hair straightener. Your dog had been a stainlesss steel dude from China. He was first all the most able minded luminary regarding a residential front side. He or she was basically some strolling volcano by using that will fire flaming inside his or her soul.

She had been not necessarily your guy to make sure you end up ignored or possibly trifled through. Overcome the guy by no means understood, listlessness your dog hardly ever was homeostasis adverse information essay indiscipline he or she by no means tolerated.

He ended up being an important pillar associated with shoot not to mention love, prefer your sensible statesman, he / she was basically furthermore calm as well as unfathomable.

He or she do not ever hesitated towards have a new important phase. They merged speed connected with judgement along with resourcefulness.

He ended up being your best owner not to mention that finest statesman which China offers at any time generated.

His or her death in 15th December 1950, remaining China not as good. Just by the loss cost-free India possesses experienced a loss on politics command this is usually complicated for you to repair.

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर निबंध मराठी

सरदार वल्लभभाई पटेल एक महत्त्वाचा नेता, महत्वाकांक्षी व्यक्तिमत्त्व होता. “सरदार” हा शब्द म्हणजे मुख्य, एक नेता होय.

सरदार वल्लभभाई पटेल भारताच्या स्वातंत्र्यासाठी लढत होते.

सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनी | Sardar Vallabhbhai Patel

ते प्रथम गृहमंत्री आणि भारताचे प्रथम उपमुख्यमंत्री होते. लोक त्याला भारताचे आयर्नमन (लोहपुरुष) म्हणत असत. सरदार वल्लभभाई पटेल यांचा जन्म Thirty-one ऑक्टोबर 1875 रोजी गुजरातच्या नडियाड गावात झाला.

गुजरातच्या ग्रामीण भागातील बालपण खर्च केले गेले आहे. त्यांच्या वडिलांचे नाव झावरभाई पटेल हे एक शेतकरी होते आणि त्यांच्या आईचे नाव लादबाई होते.

22 वर्षांच्या वयात त्यांनी मॅट्रीक परीक्षा उत्तीर्ण केली.

सरदार वल्लभभाई पटेल – Sardar Vallabhbhai Patel Biography

शिक्षण पूर्ण करण्यासाठी त्याने बर्याच वर्षांपासून आपल्या कुटुंबापासून व घरापासून दूर केले. प्रारंभिक वर्षांमध्ये, तो कायदा यशस्वी आणि कुशल वकील म्हणून सराव करत असे. 1 9 0 9 मध्ये सरदार वल्लभभाई पटेल यांची पत्नी झावरबा यांना कर्करोगाच्या ऑपरेशनसाठी मुंबईत दाखल करण्यात आले. यशस्वी शस्त्रक्रिया असूनही, तिचा रुग्णालयात मृत्यू झाला. जेव्हा त्याच्या पत्नीच्या मृत्यूनंतरची बातमी मिळाली तेव्हा तो न्यायालयीन खटल्याच्या मध्यभागी होता आणि असे म्हटले जाते की त्याने आपल्या पत्नीच्या मृत्यूच्या वृत्तपत्राची नोंद वाचली, त्याच्या खिशात ठेवली आणि न्यायालयीन खटला चालू ठेवला.

तो त्याच्या कामाबद्दल खूप भावनिक आणि दृढनिश्चयी होता.
Thirty-eight वर्षांच्या वयात त्यांनी पुढील शिक्षणासाठी Thirty महिन्यांचा अभ्यास पूर्ण केला आणि अहमदाबादमध्ये सर्वात यशस्वी बॅरिस्टर बनण्यासाठी भारतात परतले

1917 मध्ये निवडणूक जिंकल्यानंतर ते अहमदाबादचे स्वच्छता आयुक्त बनले आणि नंतर महात्मा गांधी आणि त्यांच्या सत्याग्रह आंदोलनाला ओळखले गेले आणि त्यांना पाठिंबा दिला. काँग्रेसच्या अध्यक्षपदाच्या निवडणुकीत स्वातंत्र्यानंतर, गांधीजींच्या विनंतीनुसार नेहरूंच्या बाजूने पटेल खाली पडले आणि त्यांनी भारतीय फेडरेशनमध्ये रियासतांना एकत्रित करण्यासाठी महत्त्वपूर्ण भूमिका बजावली, म्हणूनच त्यांना भारताचे एकक म्हणून संबोधण्यात आले.

सरदार वल्लभभाई पटेल यांचा 15 डिसेंबर 1 9 50 रोजी मुंबईतील बिर्ला हाऊस येथे 70 वर्षांचा मृत्यू झाला.

1 99 1 मध्ये त्यांचा मृत्यू झाल्यानंतर त्यांना भारताचा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देण्यात आला. 2014 मध्ये त्यांचा वाढदिवस Thirty-one ऑक्टोबरला “राष्ट्रीय एकता दिवस” ​​(राष्ट्रीय एकता दिवस) म्हणून साजरा करण्यात आला.
त्यांचे कार्य आणि भारताच्या स्वातंत्र्याच्या लढाईतील योगदानाने त्यांना अजूनही याद आहे

 

Contents

  
A limited
time offer!
Extended and additionally Little Essay at Sardar Vallabh Bhai Patel during Speech
और भी पढ़ें :